संदेश

वो शाम और तुम

अचानक एक जोर सी आवाज आई थी..बाहर निकल के आया तो पाया कि पास वाले ओवरब्रिज पर हादसा हो गया एक गाड़ी बुरी तरह से लड़ गई थी...गाड़ी में एक नई नवेलीदुल्हन और दूल्हा थे दुल्हन विदा हो कर आ रही थी...उसका शादी का जोड़ा चमचमा रहा था...हाथों में चूड़ा लटक रहा था और वो बदहवास सी सड़क पर पड़ी थी....लोगों ने उसे किनारे लिटा दिया था...कुछ लोग उसके चारों तरफ भीड़ लगाए उसको देखे जा रहे थे.... वहीं कुछ लोग दूल्हे के शव के पास खड़े थे...चारों तरफ चीखने चिल्लानेकी आवाज आ रही थी...जब तक मैं वहां पहुंचा मुझे किसी ने बताया कि दूल्हे की मौत हो चुकी है..शेरवानी में सजा एक नवयुवक जो अपनी दुल्हन को विदा करा कर अपने घर ले जा रहा था अब बिल्कुल निश्चित शांत पड़ा हुआ था...उसके चेहरे से ऐसा लग रहा था कि वो गहरी नींद में सो रहा था....दुनिया से बेखबर...उसके चेहरेपर हल्की ट्रिम करी दाढ़ी बहुत अच्छी लग रही थी...                          मैं जब उसके पास से हट कर दुल्हन के बीच पंहुचा तो दुल्हन को होश आ चुका था......

प्यासा

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राम के नाम को बदनाम न करो

त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने धरती पर  रावण के अत्याचारों से दुखी जनमानस,ऋषियों को मुक्ति दिलाने के लिए राम का अवतार लिया। राम के रूप में उन्होंने जनता के सामने एक आदर्श पुत्र,आज्ञाकारी शिष्य,स्नेहमयी भाई, प्रेममयी पति,और आदर्श राजा का उदाहरण पेश किया जिसके कारण वो एक सामान्य मानव से भगवान राम बन गए उनके इन्हीं गुणों के कारण जनमानस ,ऋषि,शबरी, केवट यहां तक वानर और राक्षस भी उनकी पूजा करने लगे और उन्हें अपना आराध्य मानने लगे। राम ने अपने गुणों, कर्मों और कार्य से किसी में कोई भेद नही किया। जाति, धर्म,रंग,गरीबी,कुल उनके सामने बौने नजर आते थे इसलिए वो जन जन में पूजे जाते थे और उनके साथ उनके सहयोगी भी पूजे गए। राम को हर युग में भगवान मान कर भक्ति करने वालों की कभी कमी नही रही। इसीलिए लोग अपने बच्चों का नाम भी राम रखते रहे या राम से मिलते जुलते नाम जैसे रामनाथ,रामप्रसाद, सियाराम आदि। संविधान की मूल प्रति में भी रामदरबार के चित्र को स्थान दिया गया। यहाँ तक के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के मरते समय होठों पर हे राम के शब्द थे। एक राष्ट्रीय पार्टी ने तो राम के नाम का जैसे पेटेंट करा लिया हो म...

Iztirar

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जिन्ना,सावरकर, गाँधी या फिर मंहगाई,बेरोजगारी और लचर कानून व्यवस्था

उत्तर प्रदेश का चुनाव जैसे जैसे नज़दीक आता जा रहा है पक्ष विपक्ष के राजनीतिक योद्धाओं के तरकश से अलग अलग तीर निकल कर जनता के सामने बरस रहे हैं। एक तरफ आज़ादी के पहले के माफीवीर की माफी किसके कहने पर हुई तो दूसरी तरफ पटेल,नेहरू,गाँधी और जिन्ना का राग अलापा जा रहा है। जहाँ भाजपा सावरकर को नायक बनाने में गांधी का इस्तेमाल कर रहे हैं तो अखिलेश यादव सरकार बनाने के लिए 18 से 20 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय का वोट पाने के लिए जिन्ना की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं। 2017 के चुनावों की तरह फिर से उत्तर प्रदेश 2022 के चुनाव को हिन्दू मुस्लिम में बांटने की तैयारी हो रही है जिससे साफ दिखाई पड़ता है कि कुर्सी के लालची इन नेताओं को उत्तर प्रदेश की मुख्य समस्याओं से कोई लेना देना नही। इन्हें तो बस लोगों को राष्ट्रवाद की चाशनी में चुनाव को जनता के सामने परोशना है जिससे जनता राष्ट्रवाद के खोखले सूप को चाटती रहे और नेता कुर्सी रूपी हड्डी को ले उड़ें। कोरोना महामारी के बाद से जनता की कमर टूट गई है और उस पर दिन प्रतिदिन बढ़ रही महंगाई डायन ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। लोगों को फ्री समान देने की होड़ लग गई है और हर ...

ड्रग्स के खेल के आगे सब फेल

पिछले दिनों शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को क्रूज़ शिप पर ड्रग्स पाए जाने के मामले में नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने गिरफ्तार किया। उनके साथ अरबाज़ मर्चेंट और मुनमुन धमेचा को भी गिरफ्तार किया गया। आर्यन खान और अन्य के खिलाफ एनडीपीएस कानून की धाराओं-8(सी), 20(बी), 27, 28, 29 और 35 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मुंबई की एक विशेष अदालत ने आर्यन खान को जमानत देने से इनकार कर दिया है उनकी व्हाट्सएप चैट से प्रतीत होता है कि उन्हें मादक पदार्थों के होने की जानकारी थी। ड्रग्स के मामले में सजा का प्रावधान कुछ इस तरह है। ड्रग्स के इन मामलों में सजा मात्रा पर निर्भर करती है। बेहद कम मात्रा में ड्रग रखने पर 6 महीने की सजा और 10 हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है। कम मात्रा से अधिक ड्रग्स रखने के लिए 10 साल की कठोर जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना है।   अब सवाल ये भी है क्या ड्रग्स के मामले में बॉलीवुड सेलेब्स सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं क्योंकि इससे पहले अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत, रिया चक्रवर्ती, दीपिका पादुकोण और अब आर्यन खान का नाम ड्रग्स के मामले से जोड़ा जा रहा है। बेहद कम मात...

ये कहाँ आ गए हम

देश को आज़ाद हुए 70 साल से ज्यादा हो रहे हैं वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा वाले इस देश में विभिन्न धर्मों, रंगों,जातियों का मिलाजुला माहौल आज से नही सदियों पुराना है और हमारी विभिन्नता में एकता विश्व के सभी देशों को चकित करती आई है। आज़ादी के बाद से कश्मीर घाटी का मुद्दा दो देशों के बीच जरूर एक झगड़े की जड़ बना रहा और इसीलिए धारा 370 को हटाया नही जा सका। घाटी में खूनखराबे ने वादियों में हमेशा दहशत के माहौल को ज़िंदा रखा और अमन शांति की कोशिशों पर आतंकवाद हमेशा भारी पड़ता रहा अंततः इसका परिणाम निर्दोषों को अपनी जान देकर या फिर जान बचाने के लिए पलायन करके चुकाना पड़ा। पिछले साल धारा 370 को खत्म कर दिया गया और तब एक उम्मीद ने जन्म लिया कि इतने वर्षों बाद कश्मीरी अमन चैन का सूरज देख पाएंगे और विकास की धारा घाटी की तरफ से भी बहेगी जिसका सीधा असर यहां के लोगों पर पड़ेगा जिससे वहां के निवासियों की दशा और दिशा दोनों को एक नई राह मिलेगी। लेकिन हाल के ही दिनों में कश्मीर घाटी में जिस तरह हिंदू और सिख धर्म के लोगों का कत्ल किया गया उससे जम्मू कश्मीर में फिर से तनाव की लकीरें उभर आई हैं। पिछले 1 हफ्ते में ज...