वो शाम और तुम
अचानक एक जोर सी आवाज आई थी..बाहर निकल के आया तो पाया कि पास वाले ओवरब्रिज पर हादसा हो गया एक गाड़ी बुरी तरह से लड़ गई थी...गाड़ी में एक नई नवेलीदुल्हन और दूल्हा थे दुल्हन विदा हो कर आ रही थी...उसका शादी का जोड़ा चमचमा रहा था...हाथों में चूड़ा लटक रहा था और वो बदहवास सी सड़क पर पड़ी थी....लोगों ने उसे किनारे लिटा दिया था...कुछ लोग उसके चारों तरफ भीड़ लगाए उसको देखे जा रहे थे....
वहीं कुछ लोग दूल्हे के शव के पास खड़े थे...चारों तरफ चीखने चिल्लानेकी आवाज आ रही थी...जब तक मैं वहां पहुंचा मुझे किसी ने बताया कि दूल्हे की मौत हो चुकी है..शेरवानी में सजा एक नवयुवक जो अपनी दुल्हन को विदा करा कर अपने घर ले जा रहा था अब बिल्कुल निश्चित शांत पड़ा हुआ था...उसके चेहरे से ऐसा लग रहा था कि वो गहरी नींद में सो रहा था....दुनिया से बेखबर...उसके चेहरेपर हल्की ट्रिम करी दाढ़ी बहुत अच्छी लग रही थी...
मैं जब उसके पास से हट कर दुल्हन के बीच पंहुचा तो दुल्हन को होश आ चुका था...शायद उसे खबर हो गई थी कि जिसके साथ वो एक नई दुनिया बसाने चली थी वो उसे बीच में छोड़कर चला गया था...वो बहुत तेज़ रो रही थी...उसे रोता हुआ देखकर मेरी आँखें भी भीग गई और आँसू आंखों की कोर से बाहर निकल पड़े थे...अचानक उसकी नज़र मेरी नज़रों से टकरा गई और उसने मेरी तरफ देखते हुए बोला अब मेरा क्या होगा??
मुझसे शादी कौन करेगा??
हर कोई शांत खड़ा था अचानक उसने मुझसे पूछ दिया तुम करोगे मुझसे शादी???
तुम दे सकते हो मेरा साथ??
मैं ऐसे किसी सवाल के लिए तैयार नही था मैं हड़बड़ा गया मैंने कहा मैं!
उसने फिर से कहा हाँ तुम !
सब कुछ जैसे शांत हो गया था...
सबकी निगाहें मेरी तरफ उठ चुकी थी...मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे उसकी रोती हुई आंखों ने बेड़ियों में जकड़ लिया हो..
मेरे मुँह से निकला हाँ!!
मैं करूंगा तुमसे शादी...
मेरे अंदर से जैसे कोई शक्ति बाहर आ गई थी और मैंने बिना एक पल गवाएं ज़िन्दगी का इतना बड़ा फैसला ले लिया था...
हर किसी ने मुझे बहुत सम्मान से देखा...जैसे वे मेरे फैसले में मेरे साथ थे...मैं वहां से अपने घर की तरफ चल दिया...
अभी थोड़े ही कदम बढ़े होंगे कि देखा कि एक गाड़ी अचानक से मेरी आँखों के सामने पलट गई...मैं भागकर उस जगह पर पहुंचा देखा कि इस गाड़ी में भी एक दुल्हन अपने मायके से विदा होकर ससुराल जा रही थी...गाड़ी के बाहर दुल्हन पड़ी थी और गाड़ी के अंदर दूल्हा...
साथ में एक करीब दस साल का लड़का भी बेहोश पड़ा था...मैंने सबसे पहले जाके उस लड़की को संभाला जिसे पैर में चोट आई थी और वो उठ भी नही पा रही थी...एक बेहद खूबसूरत चेहरा,रंग गोरा और ऊपर से पूरा श्रृंगार...मैंने लोगों को आवाज दी...देखो गाड़ी में लोगों को जल्दी बाहर निकालो...
किसी ने तेज़ आवाज में चिल्लाते हुए कहा-दूल्हा मर गया है और एक बच्चा भी..
ये आवाज मैंने और उस लड़की ने साथ साथ सुनी थी...मैं चाहकर भी उससे छुपा नही सकता था इस अनहोनी को...उसने मुझसे पूछा कि अब मेरा क्या होगा...कहते ही वो बेहोश हो गई....
मैंने उसे हिलाया ...सुनो,सुनो..कुछ बोलो तो कुछ नही होगा तुम्हें...सब ठीक हो जाएगा...
उसने अचानक आंखें खोली और बोली तुम्हारी शादी हो गई?? मैंने कहा नही...
वो बोली मुझसे करोगे...मैं एकदम पत्थर हो गया...उसने फिर पूछा...करोगे मुझसे शादी ?
मैंने कहा लेकिन मैं..उसने बीच में ही मेरी बात काट दी और बोली करोगे...मैं बोला हाँ...
पर सुन तो लो...मैंने थोड़ी देर पहले हुई घटना उसे बता दी...उसको मेरे ऊपर गर्व हुआ...वो बोली मुझे कोई ऐतराज नही....
मुझे आज जैसा अनुभव कभी नही हुआ था...अचानक से दो हादसे और दोनों हादसों में एक समानता...मेरे घर वाले भी वहाँ आ गए थे और सबको ये बात पता चल गई थी...
मैंने समझाने की कोशिश की अपने घर वालों को के कैसे हुआ ये सब अचानक...माँ का मुँह बन गया था...मैनें उन्हें समझाया कि वक्त का कोई भरोसा नही कब क्या हो जाए....
थोड़ी देर बाद लोगों ने क्रेन बुलवा के जो गाड़ी पलट गई थी सीधा कराया...दूल्हे को बाहर निकाला गया किसी ने उसके ऊपर एक चादर डाल दी थी....पूरा माहौल ग़मगीन हो गया था...मैंने गाड़ी के अंदर से लड़के को बाहर निकाला उसके हाथ टूट गए थे...एम्बुलेंस में लड़के को अस्पताल भिजवा दिया गया था...
मैं उस लड़की के पास लौट आया था और उसके बारे में पूछ ही रहा था...अचानक मैंने देखा कि लड़के की चादर हिल रही थी...मैं भागकर उसके पास पहुंचा तो देखा कि वो जीवित है....
मैंने तुरंत लड़की को बताया...वो खुशी से झूम उठी...वो उठ खड़ी हुई और भागकर उसके पास पहुँच गई...लड़के ने शरारत करने के लिए फिर से आंख बंद कर ली...लड़की दौड़ कर उसके गले गई...मेरे दिल से DDLJ मूवी का dialouge निकल पड़ा...जा सिमरन जी ले अपनी ज़िंदगी...मुझे उन दोनों को गले लगे देखकर बहुत खुशी हो रही थी...
मैं मन ही मन ईश्वर को धन्यवाद दे रहा था कि कैसे उसने पहले मुझे दुविधा में डाला और फिर दुविधा से निकाल लिया...
मुझे अपने जीवनसाथी के रूप में ईश्वर से मिला उपहार मिल गया था और मैं बहुत भाग्यशाली महसूस कर रहा था....
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें