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आखिर कब तक ?

जब से ख़बर पढ़ी है,देखी है अजीब सी मन में कसमसाहट है। अजीब सी घृणा के भाव आ रहे हैं जा रहे हैं। गुस्सा बेहिसाब आ रहा है पर किसपर करूँ ये समझ नही आ रहा है। दोषी कौन है ? ये प्रश्न यक्ष प्रश्न बनकर सामने खड़ा हुआ है जिसका सही जवाब नही सूझ रहा है अगर आप को मिले तो जरूर कमेंट करें ताकि महसूस कर सकूं के इंसानों के बीच में हूँ नरपषुओं के बीच में नही क्योंकि मित्र मंडली में संख्या बहुत है पर शायद उनकी जुबान भी जाति,धर्म के तालों से बंद है। #उत्तर प्रदेश के #हाथरस जिले में मनीषा नाम की लड़की का गैंगरेप हुआ है..लड़की दलित वर्ग से आती है..लड़की की जुबान काट दी गई...रीढ़ की हड्डी( स्पाइनल कॉर्ड) तोड़ दी गई है...और आज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उस लड़की की मौत हो गई है... अब प्रश्न ये उठ रहा है कि गैंग रेप किसका हुआ उस लड़की का या हमारी संस्कृति का... सरकार के खोखले वादों का ....या झूठे नारों ,स्लोगन  का..जिसमें बेटी बचाओ को बहुत बढ़ा चढ़ा के प्रचारित किया जाता है... आज 2020 में भी जाति,धर्म की भावना खत्म नही हुई है हम सब के मस्तिष्क से...तभी तो सरकार अलग अलग वर्ग,जाति, धर्म के लोगों में तरह तरह की योज...

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पापा की परी प्रिया से मिले हुए मुझे लगभग 10 वर्ष बीत गए थे..और इस तरह मैं उसके परिवार के सभी सदस्यों से बिल्कुल घर की तरह परिचित था...उसकी छोटी बहन,छोटा भाई यहाँ तक कि उसके चाचा,चाची और उनके बच्चों से भी मेरा अच्छा परिचय हो गया था... यही कोई आठवीं या नवीं क्लास में रही होगी जब वो मुझसे पढ़ने के लिए आई थी..पढ़ाई में प्रिया बहुत अच्छी होने के साथ साथ और भी कई काम जैसे क्राफ्ट,डांस में भी निपुण थी..अक्सर चिल्ड्रेन डे,टीचर्स डे और न्यू ईयर की पार्टी में वो सबसे आगे रहकर पूरी तैयारी करती और बाकी के बच्चों का उत्साह बढ़ाती थी... समय के यूँ तो पंख नही होते पर फिर भी न जाने क्यों वो बहुत तेज़ी से उड़ कर चला ही जाता है...एक एक कर क्लास में अच्छे नम्बरों से पास होते होते उसने इंटर की परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली थी..और इसी बीच चंचल मन और सत्रह की उम्र में कब दोस्ती हो गई इसका पता प्रिया को भी नही चला...तभी तो साथ में पढ़ने वाले लड़के से उसकी दोस्ती पढ़ाई से कुछ ज्यादा हो चली थी और इसकी भनक मुझे अक्सर सुनाई पड़ जाती थी...कभी दोनों का एक दूसरे की बातों में ज्यादा दखल देना तो कभी मुझसे नज़र बचा के पैरों का आ...