तुम मुझे याद आओगी
जब देखूंगा नम आंखें किसी की जब देखूंगा बेबसी किसी की जब देखूंगा अपनों से अपनों की बेरुखी जब देखूंगा कोई टूटी सी ज़िन्दगी तुम मुझे बहुत याद आओगी... जब देखूंगा किसी कॉलेज के बाहर बैठा इंतज़ार करता कोई लड़का देखूंगा जब तेज बारिश में गाड़ी से जाता कोई लड़का किसी लड़की को जाते हुए लेने तुम मुझे बहुत याद आओगी... देखूंगा जब किसी लड़के को किसी लड़की को स्कूटी सिखाते हुए उसके पीछे भागते देखूंगा जब ऑफिस के बाहर किसी लड़के को इंतजार करते देखूंगा जब ठंडी रातों में मोमोज़ के ठेले पर रुकते किसी लड़के और लड़की को तुम मुझे बहुत याद आओगी... देखूंगा जब भेलपुरी के खोमचे के पास खड़े किसी लड़के और लड़की को देखूंगा जब चाय की टपरी पर किसी लड़के और लड़की को देखूंगा जब किसी फास्टफूड के ठेले के पास खड़ी कार में बैठे किसी लड़के और लड़की को तुम मुझे बहुत याद आओगी... देखूंगा जब बस स्टेशन के बाहर खड़ी बस में बैठी किसी लड़की को छोड़ने आये लड़के की आंखों में उतरे आंसू और दिल में उठती बेचैनी और फिक्र को देखूंगा जब किसी पिक्चर हॉल में हाथों में हाथ थामे किसी लड़के और लड़की को तुम मुझे बहुत याद आओगी... देखूंगा जब किसी लड़की...