ये कहाँ आ गए हम

देश को आज़ाद हुए 70 साल से ज्यादा हो रहे हैं वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा वाले इस देश में विभिन्न धर्मों, रंगों,जातियों का मिलाजुला माहौल आज से नही सदियों पुराना है और हमारी विभिन्नता में एकता विश्व के सभी देशों को चकित करती आई है। आज़ादी के बाद से कश्मीर घाटी का मुद्दा दो देशों के बीच जरूर एक झगड़े की जड़ बना रहा और इसीलिए धारा 370 को हटाया नही जा सका। घाटी में खूनखराबे ने वादियों में हमेशा दहशत के माहौल को ज़िंदा रखा और अमन शांति की कोशिशों पर आतंकवाद हमेशा भारी पड़ता रहा अंततः इसका परिणाम निर्दोषों को अपनी जान देकर या फिर जान बचाने के लिए पलायन करके चुकाना पड़ा।
पिछले साल धारा 370 को खत्म कर दिया गया और तब एक उम्मीद ने जन्म लिया कि इतने वर्षों बाद कश्मीरी अमन चैन का सूरज देख पाएंगे और विकास की धारा घाटी की तरफ से भी बहेगी जिसका सीधा असर यहां के लोगों पर पड़ेगा जिससे वहां के निवासियों की दशा और दिशा दोनों को एक नई राह मिलेगी।
लेकिन हाल के ही दिनों में कश्मीर घाटी में जिस तरह हिंदू और सिख धर्म के लोगों का कत्ल किया गया उससे जम्मू कश्मीर में फिर से तनाव की लकीरें उभर आई हैं।
पिछले 1 हफ्ते में जिस तरह से 11 लोगों की मौत हुई जिसमें हिन्दू और सिख समुदाय के लोगों को मुख्य निशाना बनाया गया उससे घाटी के हिन्दू और सिख समाज के लोग वर्ष 2000 के बाद सबसे ज्यादा असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। तभी तो 1 हफ्ते के अंदर करीब 10 हज़ार लोगों ने कश्मीर घाटी को छोड़ दिया है और बाकी बचे लोग भी घाटी को छोड़ने का मन बना चुके हैं।
कश्मीर घाटी के हालात 90 के दशक से भी ज्यादा खराब हो रहे हैं सबसे बुरा असर जम्मू कश्मीर के बाहर से आये लोगों पर पड़ रहा है जो रोजगार के लालच में अपने शहर को छोड़कर घाटी में आये थे। प्रवासी मजदूरों, कामगारों को रोजगार से ज्यादा अपनी जान का भय सता रहा है। 
धर्म के नाम पर होने वाले रक्तपात से वहां के रहने वाले लोग बहुत डरे हुए हैं और इसीलिए अब वो घाटी से पलायन करके जा रहे हैं। जबकि मस्जिदों से ये एलान किया जा रहा है कि लोग डरें नही और पलायन न करें । पर मौत का भय इतना अधिक हो गया है कि लोग अपने सामानों को किसी भी दाम में बेचकर जल्दी से जल्दी वहां से निकलना चाहते हैं।
आतंकी संगठन के निशाने पर कश्मीरी पंडित फिर से आ गए हैं लोगों से उनके नाम पूछकर मौत के घाट उतारा जा रहा है। कश्मीरी पंडितों की वापसी अभी हो भी नही पाई थी कि बचे हुए पंडितों को भी अपनी जान का डर सता रहा है। जिस तरह से भाजपा पहले की सरकार को घेरती नज़र आती थी और आतंकवाद के लिए कांग्रेस सरकार को दोषी ठहराती थी अब जब खुद सत्ता में है तो आतंकवाद को खत्म नही कर पा रही है बल्कि आतंकी हमलों की बढ़ोतरी पर जनता से नजरें नही मिला पा रही है।
आतंकवाद की भेंट चढ़ चुके इस प्रदेश के लोगों को फिलहाल अपना भविष्य अंधेरे में घिरा दिखाई दे रहा है जिसमें अमन चैन की अनिश्चितता बनी हुई है।




टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

वो शाम और तुम

राम के नाम को बदनाम न करो

Court room