वक्त
एक मुलाकात और नज़रों का गुनाह
दिल को हज़ारों दर्द दे गए
वक्त को पहरे में बैठा
हम न जाने कितने लम्हे जी गए
रोजाना सुबह से लेकर रात तक
होंठो पर तेरी बात थी
हम खतों में लिखकर
दिल की सारी बात कह गए
तुम्हारे चेहरे के दीदार को
उठती रहीं पलकें सदा
हम तेरे हुस्न की हर अदा पर मर गए
गुजरी साथ जो तेरे
वो रातें,दिन और सुबहें
लम्हा-लम्हा तेरे साथ
वर्षों निकल गए
ज़िन्दगी में सिर्फ प्यार था
ये प्यार बेशुमार था
मान कर मंज़िल तुम्हे
हम रास्ते पर चलते रहे
फिर अचानक एक दिन
करवट ज़िन्दगी ने ऐसी जो ली
मायने उम्र के पूरे बदल गए
कल तक जो फूलों की सेज थी
वो डालियां जो फूलों से लबरेज़ थी
आज बनके काँटे जिस्मों में चुभने लगे
संगीत जो जीवन का था
अब वो चुभता शोर है
वो ज़िन्दगी कुछ और थी
ये ज़िन्दगी कुछ और है
प्यार,वफ़ा,वादें,कसमें
सब मौन होकर रह गए
जिनके लिए हम सब कुछ थे
उनके लिए अब कुछ नही
कल तक जिनकी नज़र में थे हम
आज उनकी नज़र में कोई और है
वो दौर कुछ और था
ये दौर कुछ और है
मिट्टी के तन को
मिट्टी में जाना है
इस दिल को बस फ़कत
इतना ही अब समझाना है
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