अमावस का अंधेरा

क्या बताऊँ अब तेरी बातें किसी से भी
लोग पागल समझेंगे मुझे भी
कल तक तेरी बदनामी न हो
इसलिए होठों पर छाई एक चुप्पी थी
आज जब तू किसी और की है
तो भी होठों पर छाई एक चुप्पी है
पर उसका क्या करूँ
जो हर रोज़ मेरे साथ होता है
मेरे ख्वाबों में तेरा चेहरा 
अब भी मेरे साथ होता है
लाख कोशिश कर ली
के तुझे भूल जाऊं
पर ये दिल मेरी हर कोशिश
में असफल होता है
न जाने कौन सी बात
रह गई है जो तू बताने
के लिए रोज चली आती है
और सुनने के लिए
बेताब मेरा दिल भी होता है
सिर्फ मुस्कुरा के रह जाता हूँ
जब भी मेरी आँखें खुल जाती है
जानता हूं कि अगर बता भी दूं
हाल दिल का ये किसी को
कौन मानेगा के हकीकत 
में कहीं ऐसा होता है
मेरे दिल की हालत
सिर्फ मुझको ही मालूम है
तू जुदा होकर भी 
हर रात मेरे करीब होता है
मुझसे सही नही जाती
अब ये बेकरारी दिल की
न तुझे पा ही सका 
और न तुझे खोता हूँ
कोई नही जानता कि
कैसे हर पल हर घड़ी
दिल ही दिल में मैं रोता हूँ
कभी सोचता हूँ कह दूं
मां से हाल ये दिल का
और शिकायत कर दूं 
इसकी पूरी 
पर दोष इसका अकेले 
तो नही....
इसमें कुसूर रातों में
आए ख्वाब...
और तेरे चेहरे का भी तो होता है
मालूम है शायद मां को भी 
थोड़ा - थोड़ा
तभी तो हर वक्त
तेरी शादी करा दूं
और कर दूं अपना काम
आखिरी...
ये तमन्ना से भरा टोकरा
उनके लबों पर भी होता है
प्यार शायद इसी को कहते हैं
तेरे जाने के बाद भी 
मैं तेरा हूँ
तेरे चेहरे के नूर के बिना
एक अमावस का अंधेरा हूँ

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