पत्रकार या चाटुकार

Electronic media और print media के अपने सभी भाई पत्रकारों से इतनी ग़ुज़ारिश है अगर ऊपर बैठे संपादक के डर से सच बोलने और दिखाने की हिम्मत नही है तो इस पेशे को छोड़कर दूसरा कोई काम देख लो या फिर अगर साहस है तो अपना youtube चैनल शुरू कर दो ताकि आप अपने मन की कह सके और system से सवाल कर सके। अगर आपकी बात में सच्चाई है तो लोग आपको वहां भी सुनेंगे और देखेंगे।
अब यदि बात पैसों की आए तो दूसरी जगह जॉब या अपना खुद का business कर लो।
कमसकम अपनी अंतरात्मा से सच्चे रहोगे और मन में कोई मलाल नही रहेगा।

पत्रकारिता और पैसा ये दोनों सही रास्ते पर चल कर नही हो सकते। और गर गलत रास्ते पर चलने का मन ही बना लिया है तो उन सभी गरीब,असहाय,छात्र,पीड़ित और कमजोर लोगों की हाय से डरो क्योंकि वो सब तुम्हे बहुत उम्मीद और आशा भरी निग़ाहों से देखते हैं।
कबीर ने सत्य कहा है
"दुर्बल को न सताइये,जाकी मोटी हाय।
मुई खाल की स्वास से सार भस्म हुई जाय।।"

जीवन एक ही है अब चाहे तो गणेश शंकर विद्यार्थी जी के आदर्शों पर चल कर पत्रकारिता कर लो या फिर अमीर,पूंजीपतियों और नेताओं की कठपुतली बन कर नॉकरी कर लो।
कहासुनी माफ करना । सच हमेशा कडुवा होता है पर सच तो आखिर सच होता है।
विनय मिश्रा

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