धड़कता दिल

एक ठंडी सी सुबह...
और दरवाजे पर दस्तक...
मेरा,अधमने मन से उठ कर...
दरवाजे को खोलना...
और आंखों के सामने,तुम्हारा...
मुस्कुराता चेहरा...
आंखों का अचरज से फैल कर खुलना...
मेरा प्रश्न...?
अचानक...इस तरह...
बदले में तुम्हारा प्रश्न...?
क्या हाल है ?
उत्तर में मेरी खामोशी....
अब कैसे बताऊं...
तुम्हारे बगैर अधूरा सा हूँ मैं...
तेजी से बह रहे वक़्त में...
ठहरा सा हूँ मैं...
पर तुमने समझना छोड़ दिया...
सालों पहले...
और मैंने समझाना...
समझा तो अब तक...
दिल को भी नही पाया हूँ...
जो अब तक शांत सा था...
तेरे आने से पहले...

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