एक पाती तेरे नाम की
तुम्हारे बारे में अब क्या लिखूं...
जलती तेज़ दुपहरी में...
एक घना बादल हो तुम...
मुझ पर साये की तरह...
लिपटा एक आँचल हो तुम...
जब दिख न रहा हो कोई रास्ता...
तो दिल में बंधी एक उम्मीद हो तुम...
मेरे दिल में बज रहा एक गीत हो तुम...
दुःख के मरुस्थल में बहती...
सुख की एक सरिता हो तुम...
मेरे टूटे दिल से उपजी...
एक कविता हो तुम...
उलझी हुई ज़िन्दगी में...
एक सुलझन हो तुम...
घर की किसी कोने में...
महकते हुए फूलों का...
हसीं उपवन हो तुम...
मेरे शब्दों से निकलता गीत हो तुम...
मेरे मन के मीत हो तुम...
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