त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने धरती पर रावण के अत्याचारों से दुखी जनमानस,ऋषियों को मुक्ति दिलाने के लिए राम का अवतार लिया। राम के रूप में उन्होंने जनता के सामने एक आदर्श पुत्र,आज्ञाकारी शिष्य,स्नेहमयी भाई, प्रेममयी पति,और आदर्श राजा का उदाहरण पेश किया जिसके कारण वो एक सामान्य मानव से भगवान राम बन गए उनके इन्हीं गुणों के कारण जनमानस ,ऋषि,शबरी, केवट यहां तक वानर और राक्षस भी उनकी पूजा करने लगे और उन्हें अपना आराध्य मानने लगे। राम ने अपने गुणों, कर्मों और कार्य से किसी में कोई भेद नही किया। जाति, धर्म,रंग,गरीबी,कुल उनके सामने बौने नजर आते थे इसलिए वो जन जन में पूजे जाते थे और उनके साथ उनके सहयोगी भी पूजे गए। राम को हर युग में भगवान मान कर भक्ति करने वालों की कभी कमी नही रही। इसीलिए लोग अपने बच्चों का नाम भी राम रखते रहे या राम से मिलते जुलते नाम जैसे रामनाथ,रामप्रसाद, सियाराम आदि। संविधान की मूल प्रति में भी रामदरबार के चित्र को स्थान दिया गया। यहाँ तक के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के मरते समय होठों पर हे राम के शब्द थे। एक राष्ट्रीय पार्टी ने तो राम के नाम का जैसे पेटेंट करा लिया हो म...
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