आज मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना है और सुनना भी है।पर शायद तुम्हारे पास वक्त नही क्योंकि तुम आगे बहुत आगे बढ़ चुकी हो और मैं आज भी वही खड़े तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ।
त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने धरती पर रावण के अत्याचारों से दुखी जनमानस,ऋषियों को मुक्ति दिलाने के लिए राम का अवतार लिया। राम के रूप में उन्होंने जनता के सामने एक आदर्श पुत्र,आज्ञाकारी शिष्य,स्नेहमयी भाई, प्रेममयी पति,और आदर्श राजा का उदाहरण पेश किया जिसके कारण वो एक सामान्य मानव से भगवान राम बन गए उनके इन्हीं गुणों के कारण जनमानस ,ऋषि,शबरी, केवट यहां तक वानर और राक्षस भी उनकी पूजा करने लगे और उन्हें अपना आराध्य मानने लगे। राम ने अपने गुणों, कर्मों और कार्य से किसी में कोई भेद नही किया। जाति, धर्म,रंग,गरीबी,कुल उनके सामने बौने नजर आते थे इसलिए वो जन जन में पूजे जाते थे और उनके साथ उनके सहयोगी भी पूजे गए। राम को हर युग में भगवान मान कर भक्ति करने वालों की कभी कमी नही रही। इसीलिए लोग अपने बच्चों का नाम भी राम रखते रहे या राम से मिलते जुलते नाम जैसे रामनाथ,रामप्रसाद, सियाराम आदि। संविधान की मूल प्रति में भी रामदरबार के चित्र को स्थान दिया गया। यहाँ तक के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के मरते समय होठों पर हे राम के शब्द थे। एक राष्ट्रीय पार्टी ने तो राम के नाम का जैसे पेटेंट करा लिया हो म...
अचानक एक जोर सी आवाज आई थी..बाहर निकल के आया तो पाया कि पास वाले ओवरब्रिज पर हादसा हो गया एक गाड़ी बुरी तरह से लड़ गई थी...गाड़ी में एक नई नवेलीदुल्हन और दूल्हा थे दुल्हन विदा हो कर आ रही थी...उसका शादी का जोड़ा चमचमा रहा था...हाथों में चूड़ा लटक रहा था और वो बदहवास सी सड़क पर पड़ी थी....लोगों ने उसे किनारे लिटा दिया था...कुछ लोग उसके चारों तरफ भीड़ लगाए उसको देखे जा रहे थे.... वहीं कुछ लोग दूल्हे के शव के पास खड़े थे...चारों तरफ चीखने चिल्लानेकी आवाज आ रही थी...जब तक मैं वहां पहुंचा मुझे किसी ने बताया कि दूल्हे की मौत हो चुकी है..शेरवानी में सजा एक नवयुवक जो अपनी दुल्हन को विदा करा कर अपने घर ले जा रहा था अब बिल्कुल निश्चित शांत पड़ा हुआ था...उसके चेहरे से ऐसा लग रहा था कि वो गहरी नींद में सो रहा था....दुनिया से बेखबर...उसके चेहरेपर हल्की ट्रिम करी दाढ़ी बहुत अच्छी लग रही थी... मैं जब उसके पास से हट कर दुल्हन के बीच पंहुचा तो दुल्हन को होश आ चुका था......
सुनो, अगर तुम मुझसे कल मिलो कहीं मुझसे नज़रें न चुरा लेना मुझे देख के अपना चेहरा न घुमा देना हो सकता है मुझे देख कुछ बीती बातें याद आएं कुछ बीते लम्हे याद आएं तेरी आँखों में कल की तरह कुछ आंसू फिर से आ जाएं हो सकता है ऐसा भी हो मुझे देख तुम अज़नबी बन जाओ बीती बातें भूल जाओ और नए नए नगमें गाओ होने को कुछ भी हो सकता है यही जीवन की सुंदरता है कल मिला था मैं जब तुम्हें तो बात कुछ और थी आज मिला है कोई तो भी बात कुछ और है मिलना-बिछड़ना ही तो जीवन का दौर है एक कहानी खत्म हुई तो दूजी कहानी शुरू हुई तेरे आंगन में उदय हुआ तेरे आंगन में ढलना था शायद तुमको कोई मुझसे बेहतर मिलना था मैं भी एक पल का किस्सा था तेरे जीवन का हिस्सा था कल तक मैं सबकुछ कहलाता था ये सुनकर मैं इतराता था पर होनी को कुछ और होना था मुझे तुझको खोना था तुझको मुझको जीवन अमृत अब अलग-अलग ही पीना है इसकी धड़कन में बसना है इनकी सांसों में जीना है तू अपनी अदाएं बख्श इसे मैं अपनी दुआएं देता हूँ कल तक सोची थी जो अपने लिए वो सारी उम्मीदें देता हूँ मेरे साथ न सही तुम जिसके भी साथ रहो अपनी मौजों में बहती रहो अपने सपनों को जीती रहो कुछ किस...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें