आज मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना है और सुनना भी है।पर शायद तुम्हारे पास वक्त नही क्योंकि तुम आगे बहुत आगे बढ़ चुकी हो और मैं आज भी वही खड़े तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ।
सुनो, अगर तुम मुझसे कल मिलो कहीं मुझसे नज़रें न चुरा लेना मुझे देख के अपना चेहरा न घुमा देना हो सकता है मुझे देख कुछ बीती बातें याद आएं कुछ बीते लम्हे याद आएं तेरी आँखों में कल की तरह कुछ आंसू फिर से आ जाएं हो सकता है ऐसा भी हो मुझे देख तुम अज़नबी बन जाओ बीती बातें भूल जाओ और नए नए नगमें गाओ होने को कुछ भी हो सकता है यही जीवन की सुंदरता है कल मिला था मैं जब तुम्हें तो बात कुछ और थी आज मिला है कोई तो भी बात कुछ और है मिलना-बिछड़ना ही तो जीवन का दौर है एक कहानी खत्म हुई तो दूजी कहानी शुरू हुई तेरे आंगन में उदय हुआ तेरे आंगन में ढलना था शायद तुमको कोई मुझसे बेहतर मिलना था मैं भी एक पल का किस्सा था तेरे जीवन का हिस्सा था कल तक मैं सबकुछ कहलाता था ये सुनकर मैं इतराता था पर होनी को कुछ और होना था मुझे तुझको खोना था तुझको मुझको जीवन अमृत अब अलग-अलग ही पीना है इसकी धड़कन में बसना है इनकी सांसों में जीना है तू अपनी अदाएं बख्श इसे मैं अपनी दुआएं देता हूँ कल तक सोची थी जो अपने लिए वो सारी उम्मीदें देता हूँ मेरे साथ न सही तुम जिसके भी साथ रहो अपनी मौजों में बहती रहो अपने सपनों को जीती रहो कुछ किस...
त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने धरती पर रावण के अत्याचारों से दुखी जनमानस,ऋषियों को मुक्ति दिलाने के लिए राम का अवतार लिया। राम के रूप में उन्होंने जनता के सामने एक आदर्श पुत्र,आज्ञाकारी शिष्य,स्नेहमयी भाई, प्रेममयी पति,और आदर्श राजा का उदाहरण पेश किया जिसके कारण वो एक सामान्य मानव से भगवान राम बन गए उनके इन्हीं गुणों के कारण जनमानस ,ऋषि,शबरी, केवट यहां तक वानर और राक्षस भी उनकी पूजा करने लगे और उन्हें अपना आराध्य मानने लगे। राम ने अपने गुणों, कर्मों और कार्य से किसी में कोई भेद नही किया। जाति, धर्म,रंग,गरीबी,कुल उनके सामने बौने नजर आते थे इसलिए वो जन जन में पूजे जाते थे और उनके साथ उनके सहयोगी भी पूजे गए। राम को हर युग में भगवान मान कर भक्ति करने वालों की कभी कमी नही रही। इसीलिए लोग अपने बच्चों का नाम भी राम रखते रहे या राम से मिलते जुलते नाम जैसे रामनाथ,रामप्रसाद, सियाराम आदि। संविधान की मूल प्रति में भी रामदरबार के चित्र को स्थान दिया गया। यहाँ तक के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के मरते समय होठों पर हे राम के शब्द थे। एक राष्ट्रीय पार्टी ने तो राम के नाम का जैसे पेटेंट करा लिया हो म...
क्या बताऊँ अब तेरी बातें किसी से भी लोग पागल समझेंगे मुझे भी कल तक तेरी बदनामी न हो इसलिए होठों पर छाई एक चुप्पी थी आज जब तू किसी और की है तो भी होठों पर छाई एक चुप्पी है पर उसका क्या करूँ जो हर रोज़ मेरे साथ होता है मेरे ख्वाबों में तेरा चेहरा अब भी मेरे साथ होता है लाख कोशिश कर ली के तुझे भूल जाऊं पर ये दिल मेरी हर कोशिश में असफल होता है न जाने कौन सी बात रह गई है जो तू बताने के लिए रोज चली आती है और सुनने के लिए बेताब मेरा दिल भी होता है सिर्फ मुस्कुरा के रह जाता हूँ जब भी मेरी आँखें खुल जाती है जानता हूं कि अगर बता भी दूं हाल दिल का ये किसी को कौन मानेगा के हकीकत में कहीं ऐसा होता है मेरे दिल की हालत सिर्फ मुझको ही मालूम है तू जुदा होकर भी हर रात मेरे करीब होता है मुझसे सही नही जाती अब ये बेकरारी दिल की न तुझे पा ही सका और न तुझे खोता हूँ कोई नही जानता कि कैसे हर पल हर घड़ी दिल ही दिल में मैं रोता हूँ कभी सोचता हूँ कह दूं मां से हाल ये दिल का और शिकायत कर दूं इसकी पूरी पर दोष इसका अकेले तो नही.... इसमें कुसूर रातों में आए ख्वाब... और तेरे चेहर...
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